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देव -दिवाली पर ऐसे करे भगवान शिव की पूजा और पाए इच्छापूर्ति वरदान
 

कार्तिक शुक्ल पक्ष उदया तिथि चतुर्दशी को देव - दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा होती इसे  त्रिपुरोत्सव भी कहते हैं। 

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माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव देवताओं की प्रार्थना सुनकर त्रिपुरासुर का वध किया था जिसकी खुशी में देवताओं ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था इसलिए सबको देव -दिवाली के नाम से भी जाना जाता है दिवाली के 14 दिन बाद देव  दिवाली का पर्व मनाया जाता है इस दिन स्नान कर दीपदान करने का बहुत अधिक महत्व है इस साल ये त्यौहार  18 नवंबर को मनाया जाएगा। 

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इस दिन गंगा नदी और काशी के विभिन्न घाटों पर पानी में प्रवाहित किया जाता है देवताओं का पृथ्वी पर आगमन होता है और उनके स्वागत में धरती पर दीप जलाए जाते हैं शास्त्रों के अनुसार इस दिन देवताओं का पृथ्वी पर आगमन होता है और उनके स्वागत में धरती पर दीप जलाए जाते हैं शास्त्रों के अनुसार संध्या के समय शिव मंदिर में दीप जलाते हैं शिव मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों में चौराहे पर पीपल के पेड़ ,तुलसी के पौधे में घी के  दीपक जलाए जाते हैं । 

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 इस दिन भगवान शिव के दर्शन करने और उनके अभिषेक  करने की परंपरा है ऐसा व्यक्ति को ज्ञान और धन की प्राप्ति होती है साथ ही स्वास्थ्य अच्छा रहता है और आयु में बढ़ोतरी भी होती है इस दिन किसी भी शिव  मंदिर में जाकर उनकी पूजा करें घी का दीप करें ,चंदन की धूप करें और खीर पुरी ,गुलाब की फूल चढ़ाएं चंदन   शि चंदन से शिवलिंग पर त्रिपुंड बनाएं और बर्फी का भोग लगाएं इसके बाद इस मंत्र का जाप करें- 'ऊं देवदेवाय नम'।