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Death Anniversary : एक बार राम रहीम के चाचा बनकर एके हंगल ने जीता था फैंस का दिल
 

50 साल की उम्र में बतौर अभिनेता अपने करियर की शुरुआत करने वाले अभिनेता एके हंगल ने भी कई सालों तक अलग-अलग किरदार निभाकर दर्शकों का मनोरंजन किया। 1 फरवरी, 1917 को एक कश्मीरी परिवार में जन्मे एके हंगल ने आज ही के दिन यानी 26 अगस्त 2012 को दुनिया को अलविदा कह दिया था। 60 से 70 के दशक में ज्यादातर फिल्मों में एके हंगल ने पिता या चाचा की भूमिका निभाई थी। एके हंगल ने अपने करियर में कई फिल्मों में काम किया, लेकिन आज भी लोग उन्हें शोले के रहीम अंकल के रूप में याद करते हैं। एके हंगल ने इस किरदार को हमेशा के लिए अमर कर दिया है।

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बंटवारे के वक्त आए थे मुंबई: एके हंगल ने अपना बचपन पेशावर से कराची तक बिताया। भारत के बंटवारे के बाद वे 1949 में मुंबई आ गए थे। एके हंगल ने भी बचपन से ही अपने जीवन में काफी संघर्ष किया। पत्नी की मौत के बाद एके हंगल ने अकेले ही अपने बेटे की परवरिश की। फिल्मों के साथ-साथ एके हंगल नाटकों में भी अभिनय करने में सफल रहे हैं। हंगल साहब 18 साल के थे जब उन्होंने नाटकों में अभिनय करना शुरू किया। उनकी पुण्यतिथि पर हम आपको इस लेख में उनके जीवन से जुड़ी कुछ बातें बताने जा रहे हैं।

तीन साल की कराची जेल में थे : ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मों में आने से पहले एके हंगल ने आजादी की लड़ाई भी लड़ी थी। मार्क्सवादी होने के कारण उन्हें कराची में 3 साल तक कैद किया गया। लेकिन साल 1949 में जेल से छूटने के बाद हंगल साहब अपने पूरे परिवार के साथ मुंबई आ गए हैं। हमेशा से एक्टिंग का शौक रखने वाले एके हंगल ने भी मुंबई आने के बाद बतौर एक्टर काम करने की बात कही।

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रहीम चाचा के किरदार को किया अमर : एके हंगल ने फिल्म शोले में रहीम चाचा की भूमिका निभाई थी। इस किरदार ने उन्हें हर घर में लोकप्रिय बना दिया। आज भी आपने कई बार लोगों के मुंह से यह कहते सुना होगा कि 'इतना सन्नाटा क्यों है भाई?' एके हंगल ने यह डायलॉग पहली बार बोला था। उनका डायलॉग ही उनकी पहचान बन गया। इस फिल्म के अलावा एके हंगल ने जितनी भी फिल्मों में काम किया उनमें एक अलग पहचान छोड़ी।