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ऋचा चड्ढा दे रही हैं राहुल गांधी को टक्कर, लेकिन किस मामले में?
 

नई दिल्ली: संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का भारत से आयातित गेहूं और आटे की बिक्री पर देश के बाहर प्रतिबंध लगाने का फैसला कल से ही चर्चा में है।  यह फैसला एक तरह का आश्वासन है कि भारत से यूएई को जो भी गेहूं आयात किया जाएगा, उसका इस्तेमाल यूएई की घरेलू खपत के लिए ही किया जाएगा। यूएई के इस ऐलान के साथ ही लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है। दरअसल, यूएई के इस फैसले को लेकर रॉयटर्स द्वारा एक खबर प्रकाशित की गई थी, जिसे वामपंथी एजेंडा चलाने वाले चैनल एनडीटीवी के ट्वीट पर शेयर किया गया था।

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बस, बिना खबर समझे तथाकथित उदारवादी, वामपंथी और इस्लामवादी मोदी सरकार को कोसने लगे।  किसी ने आयात और निर्यात के बीच के अंतर को समझने की कोशिश नहीं की है। दरअसल, एनडीटीवी ने ट्वीट किया था, 'ब्रेकिंग: यूएई भारतीय गेहूं के निर्यात को चार महीने के लिए निलंबित करेगा'। मशहूर एक्ट्रेस और मोदी सरकार का विरोध करने के लिए मशहूर ऋचा चड्ढा ने भी NDTV का लोगो देखा और बिना खबर समझे सीधे अपने एजेंडे को फैलाना शुरू कर दिया।  इसे शेयर करते हुए चड्ढा ने लिखा कि 'नफरत के अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रभावों का स्वागत है।' लेकिन, फिर ऋचा चड्ढा के आईक्यू पर सवाल उठाते हुए फरागो अब्दुल्ला ने टिप्पणी की कि 'आईक्यू के इस स्तर पर, अभिनेत्री राहुल गांधी की प्रतियोगी बन सकती है।' वहीं, मिस्टर खान ने भी ट्वीट कर लिखा कि, 'भारत भी कुछ दिनों में श्रीलंका जैसा हो जाएगा'। जिस पर सीमा गुप्ता ने जवाब देते हुए लिखा, 'बेवकूफ धर्म निर्यात और आयात में अंतर नहीं समझता।'

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आपको बता दें कि अतीत से कुछ ऐसा चलन चल रहा है कि अगर कोई विदेशी भारत पर उंगली उठाए तो उसे जवाब देने या देश की रक्षा करने के बजाय, भारत के तथाकथित उदारवादी, कट्टरपंथी लोग भारत के साथ हाथ मिलाएंगे। वही विदेशी।  कुछ दिनों पहले की तरह राहुल गांधी कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में जाकर भारत की बुराई कर रहे थे, हालांकि वहां राहुल को एक भारतीय अधिकारी सिद्धार्थ वर्मा ने एक राष्ट्र और राज्यों के संघ के बीच का अंतर समझाया। लेकिन, बिना समझे एजेंडा चलाने वालों को खबर कौन समझाए?