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एक्सपर्ट्स ने बताये कृषि कानून वापस लेने से होने वाला है देश को कितना नुकशान
 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि  कानून को वापस लेने का बड़ा ऐलान किया है शुक्रवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में देशवासियों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि सरकार के नेक नियत और समर्पण भाव से देश के किसानों के कल्याण के लिए कानून लेकर आई थी लेकिन देश के कुछ किसान भाइयों को सरकार समझा नहीं पाई। 

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कहीं ना कहीं बढ़ते राजनीतिक विरोध और किसान आंदोलन की वजह से मोदी सरकार ने कृषि बिल वापस लेने का फैसला कर लिया एक्सपर्ट्स ने किसान आंदोलन के वापस लेने से देश को होने वाले नुकसान के बारे में बताया है कि कानून नेक नियत से लाए गए थे लेकिन किसान उसे समझ नहीं पाए यह देश के विकास में एक बड़ा झटका है आने वाली सरकार  कृषि और मजदूरों के लिए बड़ा सुधारात्मक फैसला लेने से अगर कोई क्रांतिकारी बदलाव का फैसला होगा तो उस पर राजनीतिक कारणों से विरोध होना संभव है 

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ऐसे में कहीं ना कहीं विकास की गाड़ी को झटका  लगाता हुआ नजर आ रहा है जिस तरह से मोदी सरकार ने कृषि उपज ,व्यावसायिक इस्तेमाल व्यवसाय के रूप में देखकर जमीन से ज्यादा उपज का सही मूल्य किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य ,किसानों को दलाली से मुक्ति मुद्दों को लेकर जो सुधारवादी कदम उठाए गए थे इसकी वजह से वह निश्चित रूप से 10 वर्ष के लिए आगे धकेल दिए गए हैं। 

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इससे ना केवल कृषि क्षेत्र को झटका लगा है बल्कि असंगठित क्षेत्र के मजदूरों इससे  वंचित रह जाएंगे यह किसान बिल बड़े स्तर पर किसानों को लाभ पहुंचा सकते थे देश की जीडीपी इन से सुधार की संभावनाएं थीं लेकिन इस वजह से देश की कई संगठित सेवा क्षेत्र  और इंडस्ट्री को भारी झटका लगा है वहीं कृषि योग्य भूमि का समुचित इस्तेमाल ना होने की वजह से देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ने की संभावना को भी कम जरूर किया है वहीं अब इस तरीके से विरोध के चलते आने वाली सरकारें भी कोई भी बड़ा  फैसला लेने से बचेगी जो कि विकासशील देश की प्रगति  के हिसाब से उचित नहीं है