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'भगवान जगन्नाथ के कोहिनूर को वापस लाओ..' ओडिशा समूह ने की पीएम मोदी की मांग
 

भुवनेश्वर : ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का निधन हो गया है. उनकी मौत के बाद से सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और भारत में यूजर्स कोहिनूर हीरा वापस लाने की मांग करने लगे हैं। इस बीच, ओडिशा स्थित जगन्नाथ सेना ने दावा किया है कि कोहिनूर हीरा मूल रूप से भगवान जगन्नाथ का है और इसे वापस लाने की मांग की है।

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दरअसल, जगन्नाथ सेना ने दावा किया है कि कोहिनूर हीरा भगवान जगन्नाथ का था। इतना ही नहीं जगन्नाथ सेना ने हीरा वापस लाने में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्तक्षेप की भी मांग की है। राष्ट्रपति को सौंपे गए एक ज्ञापन में, जगन्नाथ सेना ने 12 वीं शताब्दी के प्रसिद्ध पुरी मंदिर में कोहिनूर हीरे को वापस लाने की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए राष्ट्रपति के हस्तक्षेप की मांग की। जगन्नाथ सेना के संयोजक प्रिया दर्शन पटनायक ने एक ज्ञापन में कहा कि कोहिनूर हीरा भगवान जगन्नाथ का है, लेकिन अब यह कीमती हीरा इंग्लैंड की महारानी के पास है. हमारे प्रधान मंत्री जी से अनुरोध है कि भगवान जगन्नाथ के लिए इसे भारत लाने के लिए कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह ने स्वेच्छा से भगवान जगन्नाथ को कोहिनूर दान किया था।

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फिलहाल ब्रिटेन की महारानी के निधन के बाद कोहिनूर एक बार फिर सुर्खियों में है। कोहिनूर को भारत वापस लाने की मांग कई बार की जा चुकी है। हालांकि, ब्रिटेन ने हमेशा इस हीरे को देने से इनकार किया है। एक अनुमान के मुताबिक कोहिनूर की कीमत करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये है। कोहिनूर को दुनिया के सबसे कीमती रत्नों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि कोहिनूर आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में वर्ष 1310 में खटिया राजवंश के शासनकाल के दौरान खुदाई में पाया गया था। वहीं यह भी माना जाता है कि, 1310 ई. में, अलाउद्दीन खिलजी ने आंध्र प्रदेश में मां भद्रकाली मंदिर पर हमला किया और देवी की बाईं आंख में यह हीरा लूट लिया, जिसके बाद कोहिनूर हीरा एक हाथ से दूसरे हाथ में चला गया, बाबर, हुमायूँ, शेर शाह सूरी से लेकर शाहजहाँ, औरंगजेब और पटियाला के महाराजा रणजीत सिंह तक।