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फ्रेंडशिप डे 2022 : कृष्ण और सुदामा की दोस्ती से बड़ा कुछ नहीं
 

आप सभी जानते हैं कि अगस्त के पहले रविवार को फ्रेंडशिप डे के रूप में मनाया जाता है। इस दिन दोस्त अपने दोस्तों को लेकर गिफ्ट देते हैं और बड़ी धूमधाम से इस दिन को सेलिब्रेट करते हैं।  जहां तक ​​दोस्ती की बात है तो इसे आज ही नहीं बल्कि इतिहास में भी काफी अहम माना जाता था। तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि पौराणिक ग्रंथों में मित्रता का क्या उल्लेख मिलता है। आइए जानते हैं उन दिनों के बारे में।

कहा जाता है कि गांधारी और कुंती का देवरानी-जिठानी के साथ संबंध था, लेकिन उन्होंने उनके बीच दोस्ती भी निभाई है। आखिर महाभारत का युद्ध दोनों बेटों के बीच हुआ है, फिर भी उन्होंने दोस्ती और प्यार का धर्म निभाया।

कृष्ण और सुदामा- जो अपनी दोस्ती को नहीं जानते। कृष्ण सुदामा को निस्वार्थ मित्रता का सर्वश्रेष्ठ और उदाहरण माना जाता है। उनकी दोस्ती अमीर और गरीब के बीच का अंतर नहीं थी। सांदिवानी के आश्रम में पढ़ते समय कृष्ण राजकुमार थे। वहीं सुदामा एक गरीब ब्राह्मण के पुत्र थे। जब सुदामा ने अपनी गरीबी में कृष्ण को याद किया। तब तक कृष्ण द्वारिकाधीश हो चुके थे, लेकिन कृष्ण ने जिस तरह से बिना बताए उनकी पीड़ा को समझा और उनकी मदद की, वह दोस्ती की सबसे बेहतरीन मिसाल है।