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Remedies for Mouth Ulcers: मुंह के छालों से परेशान हैं, तो जानिए इसका घरेलु उपचार
 

पीपल का पेड़ अपने धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। यह इस पेड़ की छाया और ठंडी हवाओं के लिए जाना जाता है। कई लोग इस पेड़ की पूजा भी करते हैं। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि पीपल के पेड़ की पत्तियों से लेकर इसकी छाल तक इसका इस्तेमाल शरीर की कई समस्याओं को दूर करने के लिए किया जा सकता है। जी दरअसल इसकी छाल से बना काढ़ा पीने से सांस की समस्या दूर हो सकती है और अन्य समस्याओं से भी छुटकारा मिल सकता है।  आइए जानते हैं पीपल की छाल का काढ़ा पीने से होने वाले फायदों के बारे में।

मुंह के छाले होते हैं ठीक - पीपल की छाल का काढ़ा पीने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं। वास्तव में, यह दर्द को भी दूर कर सकता है। मुंह के छालों को ठीक करने के लिए पीपल की छाल को पानी में उबाल लें और इस पानी से दिन में 2 से 3 बार कुल्ला करें। ऐसा करने से मुंह के छालों से राहत मिलेगी।

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खांसी से राहत- खांसी की समस्या को दूर करने के लिए आप पीपल की छाल का काढ़ा पी सकते हैं। हां, क्योंकि इससे खांसी हो सकती है। दरअसल, अपनी खांसी की समस्या को दूर करने के लिए 1 गिलास पानी में 2 से 3 छाल डालकर अच्छी तरह उबाल लें। वहीं जब पानी अच्छी तरह से उबल जाए तो इससे गरारे करें।

घाव और चोट से छुटकारा - पीपल की छाल का काढ़ा घाव और चोट से भी छुटकारा दिलाता है। जी हां और इसके लिए पीपल की छाल को 1 कप पानी में डालकर अच्छी तरह उबाल लें. उसके बाद घाव और चोट को इस पानी से धो लें। ऐसा करने से संक्रमण की समस्या दूर हो जाएगी।

झुर्रियों को दूर करने में कारगर - त्वचा से झुर्रियों की समस्या को दूर करने के लिए आप पीपल की छाल के काढ़े का इस्तेमाल कर सकते हैं। जी हां और इसके लिए काढ़े को ठंडा होने दें और फिर इससे अपना चेहरा धो लें। ऐसा करने से त्वचा की झुर्रियां कम हो जाएंगी।

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हिचकी में आराम- पीपल की छाल का काढ़ा हिचकी की समस्या से निजात दिला सकता है। जी हां और इसका इस्तेमाल करने के लिए पीपल की छाल को जलाकर राख कर लें और अब इसे पानी में घोल लें. इसके बाद इस पानी को पी लें और इससे हिचकी की समस्या दूर हो सकती है।

पीपल की छाल का काढ़ा कैसे तैयार करें? - पीपल की छाल का काढ़ा बनाने के लिए 3 गिलास पानी लें। इसमें 10 ग्राम पीपल की छाल मिलाएं। फिर इस पानी को अच्छी तरह उबाल लें। जब पानी आधा रह जाए तो इसे ठंडा होने दें। इस काढ़े का नियमित रूप से सेवन करें। इस काढ़े को दिन में दो से तीन बार पिएं।